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Sunday, 15 January 2017

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अपनी वेबसाइट कैसे तैयार करें? Website Banane Ke Baad Kya Kare,Domain Kaise Kharide BestIndiaTrick

अगर आप अपनी बेवसाइट बनाना चाहते हैं तो आपको वेब डिवेलपमेंट के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी होनी चाहिए। अपनी वेबसाइट बनाने से जुड़ी तमाम बातों को विस्तार से समझाने के लिए हम आपके लिए लाए हैं एक खास सीरीज। इस सीरीज के पहले भाग में वेबसाइट से जुड़ी बुनियादी जानकारी दे रहे हैं









अगर आप इंटरनेट पर अपनी वेबसाइट चाहते हैं तो सबसे पहले उसके लिए 'डोमेन नेम' खरीदना होगा। डोमेन नेम? सुनने में यह शब्द तकनीकी किस्म का महसूस होता है, लेकिन सीधे-सादे लफ़्जों में कहें तो यह आपकी वेबसाइट का वेब एड्रेस है। वही अड्रेस, जो आप इंटरनेट एक्सप्लोरर, क्रोम या फायरफॉक्स जैसे ब्राउजर की अड्रेस बार में डालते हैं। मिसाल के लिए google.com, indiatimes.com या yahoo.com ऐसे अड्रेस हर वेबसाइट की पहचान हैं। यूं समझ लीजिए कि जिस तरह लिफाफे पर डाक का पता होना जरूरी है, उसी तरह वेबसाइट के लिए डोमेन नेम होना जरूरी है।

डोमेन नेम की फीस

- डोमेन नेम के लिए सालाना फीस लगती है जो 100 रुपये से लेकर 500-600 सौ रुपये तक हो सकती है।
- अलग-अलग 'किस्म' के डोमेन नेम के लिए अलग-अलग कीमत है।
- किस्म? जी हां, क्या आपने किस्म-किस्म के वेब अड्रेस नहीं देखे: usa.net, yahoo.com, cseindia.org, olx.in आदि।
- डोमेन नेम में बिंदु(.) के बाद आने वाले हिस्से को डोमेन एक्सटेंशन कहा जाता है।
- अलग-अलग डोमेन एक्सटेंशन के लिए अलग-अलग दरें ली जाती हैं, जो डिमांड और सप्लाई के नियम के आधार पर बदलती रहती हैं।
- कभी-कभी .in डोमेन नेम सिर्फ 85 रुपये में उपलब्ध हो जाता है तो कभी वही 500 रुपये तक पहुंच जाता है।
- बहरहाल, सबसे लोकप्रिय डोमेन एक्सटेंशन .com है, जो इन दिनों 500 रुपये के आसपास उपलब्ध है।

एक्सटेंशन की किस्म-किस्म के

- डोमेन एक्सटेंशन कई तरह के हैं। इनमें से कुछ खास कामों के लिए आरक्षित हैं :
.edu: स्कूल-कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के लिए
.gov: सरकारों के लिए
.mil: सेना के लिए।

- सबसे ज्यादा मशहूर एक्सटेंशन .com है, जिसके नाम पर कई बार पूरे वेब जगत को ही 'डॉट कॉम' कह दिया जाता है।
- दो और प्रमुख डोमेन एक्सटेंशन हैं :.net, .org और .info इन सबको टॉप लेवल डोमेन या 'टीएलडी' कहा जाता है।
- इनके अलावा हर देश के लिए भी डोमेन एक्सटेंशन रिजर्व किए गए हैं, जिन्हें कंट्री कोड टॉप लेवल डोमेन कहा जाता है। जैसे भारत के लिए .in, अमेरिका के लिए .us वगैरह।
- अपनी वेबसाइट के लिए mysite.com डोमेन नेम पसंद करेंगे या mysite.in इसका फैसला आपको ही करना है।
डोमेन एक्सटेंशन बदलने से वेबसाइट की परफॉर्मेंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- आप अंग्रेजी के 63 अक्षरों की सीमा के भीतर रहते हुए जैसा चाहें डोमेन नेम रख सकते हैं, बशतेर् उसके इस्तेमाल पर कोई कानूनी रुकावट न हो।

क्या डोमेन नेम लेने पर मेरी वेबसाइट इंटरनेट पर आ जाएगी?
- नहीं, वह महज पहली सीढ़ी है। अभी तो आपको वेबसाइट बनवानी है और फिर उसे इंटरनेट पर रखने के लिए स्पेस भी खरीदना है।

कहां होगा रजिस्टर

- दुनिया में डोमेन नेमों की व्यवस्था का संचालन ICANN(इंटरनेट ऑर्गनाइजेशन ऑफ असाइन्ड नेम्स ऐंड नंबर्स) नामक संस्था करती है।
- उसने डोमेन नेम रजिस्ट्रेशन के लिए कई कंपनियों को ऑथराइज किया हुआ है, जिन्हें डोमेन रजिस्ट्रार कहा जाता है।
- आप इनके मार्फत या उनके रिसेलर्स के जरिए अपना डोमेन नेम रजिस्टर करवा सकते हैं।

- कुछ प्रमुख डोमेन नेम रजिस्ट्रार हैं:

networksolutions.com
net4.in
bigrock.in
in.godaddy.com
registry.in
siliconhouse.net
enom.com
namecheap.com
domains.org
economicalhost.com

रजिस्ट्रेशन ऐसे करें

- डोमेन नेम रजिस्ट्रेशन बेहद आसान है।
- अपने पसंदीदा डोमेन नेम रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर जाइए।
- वहां दिए गए टेक्स्ट बॉक्स में अपनी पसंद का डोमेन नेम लिखें और सर्च बटन दबाएं।
- अगर नाम उपलब्ध है तो आपसे पूछा जाएगा कि क्या आप इसे तुरंत रजिस्टर करवाना चाहते हैं?
- अगर हां तो जरूरी ब्योरा (अपना नाम, पता, ईमेल अड्रेस वगैरह) दें।
- इसके बाद क्रेडिट कार्ड से रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान कर दें।
- कुछ ही सेकंड में आपके ईमेल अड्रेस पर कन्फर्मेशन मेल आ जाएगी, जिसमें डोमेन नेम कामयाबी से रजिस्टर कर दिए जाने की सूचना होगी।
- आगे कभी नाम, पते आदि में कोई बदलाव करना चाहें तो वेबसाइट के कंट्रोल पैनल का यूजरनेम और पासवर्ड भी मिलेगा।

नोट: किसी नई या छोटी फर्म की बजाय किसी बड़ी और जमी-जमाई कंपनी के जरिए डोमेन रजिस्ट्रेशन करवाएं, भले वहां रजिस्ट्रेशन थोड़ा महंगा क्यों न पड़े क्योंकि कई बार छोटी कंपनियां बंद हो जाती हैं और उनसे जुड़े सभी लोग अधर में लटक जाते हैं।

कितना खर्च

भारत में मशहूर कुछ चुनिंदा वेबसाइटों पर डोमेन रजिस्ट्रेशन की मौजूदा दरें हैं:

 In.godaddy.com Net4.in Bigrock.in.com 600 रुपये 580 रुपये 599 रुपये.net500 रुपये615 रुपये499 रुपये.org378 रुपये299 रुपये299 रुपये.in400 रुपये549 रुपये399 रुपये.info290 रुपये615 रुपये
399 रुपये


मुफ्त के डोमेन नेम!

- गूगल भारतीय कारोबारियों को एक साल के लिए .in डोमेन और फ्री वेब होस्टिंग सुविधा दे रहा है।
- इसके लिए indiagetonline.in पर जाएं।
- अगर आपके लिए अपनी वेबसाइट का डोमेन एक्सटेंशन कोई खास मायने नहीं रखता तो आप ऐसे डोमेन नेम भी ले सकते हैं, जिनके हमेशा फ्री रहने के आसार हैं। ऐसे तीन एक्सटेंशन हैं :
.co.cc (रजिस्ट्रेशन यहां कराएं www.co.cc)
.co.nr (freedomain.co.nr)
.tk (freedomains.sriz.tk)
- यह फ्री डोमेन नेम कुछ इस तरह का होगा : mysite.co.cc, mysite.co.nr
- कुछ वेब होस्टिंग वेबसाइट्स साल भर का वेब होस्टिंग पैकेज लेने पर मुफ्त डोमेन नेम देती हैं, मसलन : networksolutions.com

कैसे खोजें नाम

- डोमेन नेम रजिस्टर करने वाली लगभग सभी वेबसाइटों पर एक टूल उपलब्ध होता है, जिसका इस्तेमाल कर आप देख सकते हैं कि आपकी पसंद वाला डोमेन नेम रजिस्टर करवाने के लिए उपलब्ध है या किसी और ने उसे पहले ही ले लिया है।
- कुछ वेबसाइट्स ऐसी भी हैं, जो खास तौर पर इसी तरह की चेकिंग के लिए बनाई गई हैं। मसलन :

checkdomain.com
domainsearch.com
instantdomainsearch.com

अगर न मिले पसंदीदा नाम

विकल्प 1 :
दूसरे अच्छे एक्सटेंशन को चुन लें। अगर mysite.com नाम नहीं मिला तो mysite.in सही। चुनाव का क्रमइस तरह रखें : .com, .in, .org, .net, .info, .co.in
विकल्प 2 :
स्पेलिंग में जरा सा बदलाव करें, कोई अतिरिक्त अक्षर जोड़ लें, मसलन : jaipurirajai.com या ejaipurirazai.com
विकल्प 3 :
- उस शख्स से संपर्क करें, जिसने आपका पसंदीदा नाम बुक करा रखा है।
- हो सकता है कि वह पैसे लेकर नाम आपको देने पर राजी हो जाए।
विकल्प 4 :
- किसी वेबसाइट (मसलन : networksolutions.com) पर उपलब्ध डोमेन बैकऑर्डर सेवा का इस्तेमाल करें।
- ये वेबसाइटें आपका पसंदीदा डोमेन नेम एक्सपायर होते ही उसे आपकी तरफ से बुक करवा लेती हैं और इसके लिए एक तय फीस लेती हैं।

किसने लिया मेरा नाम
अगर आपका पसंदीदा डोमेन नेम किसी और ने रजिस्टर करवा रखा है तो उस शख्स तक पहुंचना नामुमकिन नहीं।

- Whois नामक टूल के जरिए आप उसका नाम, पता, ईमेल अड्रेस, फोन नंबर, डोमेन रजिस्टर करवाने की तारीख, उसके एक्सपायर होने की तारीख आदि का पता लगा सकते हैं।

- कुछ वेबसाइट्स यही ब्योरा मुहैया कराती हैं, मसलन :
whois.net
whois.com/whois
whois.sc
internic.net/whois.html
who.godaddy.com

कैसा हो आपका डोमेन नेम
- जितना छोटा उतना अच्छा।
- नाम जितना लंबा होगा, लोगों को उसे याद रखने उतनी ही दिक्कत होगी।
- ऐसे लोग कई बार चाहकर भी आपकी साइट तक आ नहीं सकेंगे।
- छोटा नाम याद तो रहता ही है, टाइपिंग में गड़बड़ी की आशंका भी कम रहती है। - vishwahindisammelan.com जैसे लंबे डोमेन नेम को टाइप करना मुश्किल होगा, बनिस्बत ebay.com के।

नाम जो अपील करे :
- आकर्षक, लुभावने, अपीलिंग नाम आसानी से याद रह जाते हैं। मसलन : paisa.com, jaldi.com, merinews.com आदि।

आसान स्पेलिंग :
- आजकल स्पेलिंग उलट-पलटकर नाम रखने का चलन चल निकला है। मसलन : saavn.com, flickr.com या myntra.com
- ऐसी स्पेलिंग को भूलना बहुत आसान है, याद रखना मुश्किल।
- आप तक आने वाले को पहेली में उलझाने की कोई जरूरत नहीं है। savan.com, flicker.com या mantra.com ज्यादा सुविधाजनक नाम हैं।

ब्रैंड से जुड़ा नाम :

- अपने, अपने संस्थान या ब्रैंड के नाम से जुड़ा नाम हमेशा अच्छा रहता है।
- कोका कोला कंपनी की वेबसाइट पर जाने के इच्छुक इंसान के मन में सबसे पहले cocacola.com वेब अड्रेस ही आएगा।
- हालांकि सर्च इंजनों ने काम आसान कर दिया है, इसलिए थोड़ा उल्टा-पुल्टा नाम होने पर भी लोग वेबसाइट तक पहुंच ही जाते हैं, लेकिन एकदम सटीक नाम मौजूद है तो खामख्वाह नाम बिगाड़ने का क्या मतलब!

काम से जुड़ा नाम :

- अगर ब्रैंड या नाम से जुड़ा डोमेन नेम उपलब्ध न हो तो अपने क्षेत्र से जुड़ा नाम लेने में भी बुराई नहीं है। मसलन, खबरों से जुड़े संस्थानों के लिए news.com
या jaipurirazai.com (जयपुरी रजाई.कॉम)।
- ऐसे नाम बहुत डिमांड में हैं और अब आसानी से नहीं मिल पाते। लेकिन ये बहुत ज्यादा सर्च फ्रेंडली हैं, क्योंकि ज्यादातर लोग खबरें देखने के लिए सर्च इंजन में news या jaipuri razai जैसे कीवर्ड लिखते हैं। तब ऐसी वेबसाइटें सर्च रिजल्ट्स में सबसे ऊपर दिखाई देती हैं।
- सर्च फ्रेंडली नाम रजिस्टर करवाते समय सोचें कि सर्च इंजनों पर क्या कीवर्ड टाइप करने वाले आपकी साइट तक पहुंचेंगे?
- डोमेन नेम उस कीवर्ड के जितना करीब होगा, इंटरनेट पर साइट की विजिबिलिटी उतनी ही बढ़ेगी।
- जैसे हिंदी की पुस्तकें प्रकाशित करने वाले प्रकाशक के लिए hindipublisher.com या hindibooks.com अच्छे नाम हो सकते हैं।
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Unknown

टाइपिंग सिखाने वाली वेबसाइटें BestIndiaTrick

टाइपराइटर कब के गुम हो गए , लेकिन टाइपिंग की जरूरत आज भी है। अगर आपने टाइपिंग का अभ्यास किया है , तो कंप्यूटर पर काम करना सुविधाजनक हो जाता है। जो लोग दो उंगलियों का इस्तेमाल करते हुए या फिर कीबोर्ड को गौर से देखकर टाइप करते हैं , वे तेजी से काम निपटाने की सोच भी नहीं सकते। टाइपिंग सीखना इतना मुश्किल नहीं है। आइए जानें कुछ ऐसी वेबसाइटों के बारे में जो टाइपिंग की ट्रेनिंग देती हैं:



typingweb.com
टाइपिंगवेब डॉट कॉम पर हर किस्म के यूजर्स के लिए टाइपिंग लेसंस हैं और टीचर्स के लिए खास किस्म के टूल भी। पहली बार टाइपिंग करने जा रहे लोगों से लेकर पेशेवरों तक को यहां टाइपिंग सीखने में मजा आएगा। आपकी टाइपिंग कितनी शुद्ध है और स्पीड कितनी बढ़ रही है , इस पर निगाह रखना बहुत आसान है। पूरी प्रक्रिया को दिलचस्प बनाने के लिए टाइपिंग के कुछ गेम भी हैं और कोर्स पूरा करने पर बाकायदा सर्टिफिकेट भी दिया जाता है , वह भी फ्री।

freetypinggame.net
फ्रीटाइपिंगगेम डॉट नेट पर धैर्य के साथ टाइपिंग सिखाई जाती है। एक बार में सिर्फ दो की लेकर जैसे d और k । उनका अभ्यास हो जाने पर दूसरी दो की पर आते हैं। अक्षरों की शुरुआत से पहले बाकायदा कीबोर्ड पर हाथ जमाने की प्रैक्टिस कराई जाती है ताकि आप टच-टाइपिंग के एक्सपर्ट बन सकें। इसके बाद एक-एक कर लेसन सामने आते हैं। ऑनलाइन कीबोर्ड की मदद लेते हुए टाइपिंग में मास्टरी करना आसान है। अभ्यास के दौरान टारगेट स्पीड चुन सकते हैं जो पांच से 60 कैरेक्टर प्रति मिनट तक हो सकती है।

bbc.co.uk/schools/typing
बीबीसी ने स्कूली बच्चों को खेल-खेल में टाइपिंग का अभ्यास कराने के लिए यह दिलचस्प वेबसाइट बनाई है। यहां मुश्किल के हिसाब से टाइपिंग के अभ्यास के चार अलग-अलग लेवल हैं। साइट का दावा है कि इसकी 12 स्टेज पार करने तक आप टाइपिंग में मास्टरी हासिल कर लेंगे। लेसंस में ऑडियो भी हैं और बड़ी दिलचस्प कॉमेंट्री भी।

goodtyping.com
गुडटाइपिंग डॉट कॉम पर यूजर को अंग्रेजी ही नहीं , 20 अलग-अलग भाषाओं (हिंदी नहीं) में टाइपिंग सिखाने की व्यवस्था है , जैसे फ्रेंच , जर्मन , इटैलियन , पुर्तगाली आदि। फोकस इस बात पर है कि आप कीबोर्ड पर अपनी उंगलियां सही ढंग से रखना सीखें ताकि टाइपिंग के समय सबको इस्तेमाल कर सकें। टाइपिंग के लिए 27 लेसन हैं। न कुछ डाउनलोड करने की जरूरत है और न ही कोई फीस देने की। हां , रजिस्ट्रेशन करना जरूरीहै , जो फ्री है।

hindityping.in
हिंदी में टाइपिंग सीखने के इच्छुक लोग हिंदीटाइपिंग डॉट इन को आजमा सकते हैं , हालांकि यहां यूनिकोड नहीं बल्कि लीगेसी डेव लिस फॉन्ट ( Dev Lys) का इस्तेमाल किया जाता है। कीबोर्ड भी रेमिंगटन इस्तेमाल होता है। अगर आप कृति देव , डेव लिस , अजय , अमन , आगरा आदि फॉन्ट्स में हिंदी में काम करना चाहते हैं तो अभ्यास के लिए इसकी मदद ले सकते हैं। एक और वेबसाइट indiatyping.com पर भी हिंदी में टाइपिंग सिखाई जाती है लेकिन वह भी इन्हीं फॉन्ट्स के हिसाब से चलती है।
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जी-मेल से अब 10 जीबी अटैचमेंट करी How To Attach 10Gb File In Gmail BestIndiaTrick

जी-मेल यूजर अब 10 जीबी तक की फाइलों को अटैचमेंट के तौर पर भेज सकते हैं। अब तक जीमेल से 25 एमबी से ज्यादा का अटैचमेंट भेज पाना मुमकिन नहीं था।
- जो लोग 25 एमबी से ज्यादा का अटैचमेंट भेजना चाहते हैं, उन्हें पहले अपनी फाइल को गूगल ड्राइव में ट्रांसफर करना होगा।



फ्लिपकार्ट का ई-बुक स्टोर
- फ्लिपकार्ट डॉट कॉम के डिजिटल स्टोर Flyte ई-बुक कैटिगरी में उतरने का फैसला किया है।
- इन ई-बुक्स को पढ़ने के लिए आपको फ्लाइट ई-बुक्स ऐप डाउनलोड करना होगा।
- अभी यह ऐप सिर्फ एंड्रॉयड प्लैटफॉर्म पर ही उपलब्ध है। जल्दी ही यह विंडोज 8 पर भी उपलब्ध होगा। फ्लाइट ई-बुक्स स्टोर पर अभी करीब एक लाख ई-बुक्स हैं।

सैमसंग की अल्ट्राबुक
- सैमसंग ने भारतीय बाजार में दो नई अल्ट्राबुक और एक नोटबुक लॉन्च की हैं।
- ये हैं : सैमसंग सीरीज 5 अल्ट्रा टच, सैमसंग नोटबुक सीरीज 9 और सैमसंग सीरीज 5 अल्ट्राबुक।
- सैमसंग सीरीज 5 अल्ट्रा टच सैमसंग की पहली टच अल्ट्राबुक है। यह विंडोज 8 पर चलती है। इसकी कीमत है 64 990 रुपये।

एचटीसी का एंड्रॉयड अपडेशन
- एचटीसी ने अपने वन एक्स यूजर्स के लिए एंड्रॉयड 4.1 अपडेशन की शुरुआत कर दी है।
- यूजर्स के पास इस अपडेट का नोटिफिकेशन नहीं आया है तो वे इस रूट को फॉलो करके अपडेट हासिल कर सकते हैं: Settings > About > Software updates >Check now

मोबाइल से जानें बैंक बैलेंस
- मोबाइल फोन के जरिए अपना बैंक बैलेंस चेक करना और चेक बुक की रिक्वेस्ट भेजना आसान बना दिया गया है।
- इसके लिए आपको अपने मोबाइल से *99# डायल करना होगा।
- इस सुविधा के लिए अभी तक आपके पास स्मार्टफोन होना जरूरी है जिस पर ऐप डाउनलोड करके आप इस सुविधा का फायदा उठा सकते हैं, लेकिन इस नई सुविधा से किसी भी तरह के साधारण मोबाइल फोन से भी यह सुविधा ली जा सकती है।
- वर्तमान में यह सुविधा एमटीएनएल और बीएसएनएल नेटवर्क पर 23 बैंकों के लिए उपलब्ध है।

आईटी एक्ट की नई गाइडलाइंस
- आईटी एक्ट के सेक्शन 66ए के तहत होने वाली गिरफ्तारियों के संबंध में नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं।
- अब इस एक्ट के तहत कार्रवाई करने के लिए किसी सीनियर पुलिस अधिकारी की मंजूरी लेना जरूरी होगा। अभी तक सिर्फ थाना प्रभारी ही अपने स्तर पर कार्रवाई करते रहे हैं।
- अब शिकायत दर्ज करने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में डीसीपी लेवल जबकि शहरी इलाकोंमें आईजी लेवल के अधिकारी से मंजूरी लेना जरूरी होगा।
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Unknown

इंटरनेट पर कैसे शेयर करें बड़ी फाइलें kaise share kare badi file in bestindiatrick

अधिकतर लोगों को इंटरनेट पर बड़ी फाइल शेयर करना मुश्किल काम लगता है। फिल्म और बड़े डाक्युमेंट्स जैसी हेवी फाइल इंटरनेट पर शेयर करने में दिक्कत आती है। इस प्रॉब्लम से पार पाने के कुछ आसान तरीके बता रहे हैं करण बजाज। आगे क्लिक करिए...


Bayfiles.net 
इस साइट पर आपकी अपलोडेड फाइल्स कितनी बार भी डाउनलोड करने की सुविधा है। इस पर 5GB तक की फाइल शेयर की जा सकती है। 30 दिन की इनऐक्टिविटी के बाद साइट आपकी फाइल हटा देती है।

Filedropper.com 
इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है। इस साइट पर आपको किसी साइन-अप की जरूरत नहीं पड़ती और आप 5GB तक की फाइल्स अपलोड कर सकते हैं।

Slingfile.com 
इस साइट में बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते लेकिन इसकी सर्विस आपको 50GB तक की फ्री अपलोडिंग की सुविधा देती है। इससे आप एक बार में कई फाइल्स भी अपलोड कर सकते हैं। फाइल्स 180 दिन की इनएक्टिविटी के बाद ही साइट से डिलीट होती हैं। अपलोडेड फाइल्स को जितना चाहें उतनी बार डाउनलोड करने की सुविधा भी है।

Yourfilelink.com 
इस साइट के लिए भी साइन-अप करने की जरूरत नहीं पड़ती। आप 5 GB की फाइल्स अनलिमिचेड डाउनलोड की सुविधा के साथ शेयर कर सकते हैं। वैसे यह किसी फाइल को 15 दिन के बाद डिलीट कर देता है।

Filewire.me 
यह वेबसाइट फाइल्स स्टोर करने के लिए ट्रांसफर करने की सुविधा देती है। आप बिना रजिस्टर किए 5GB जबकि फ्री अकांउट से 30 GB तक फाइल शेयर कर सकते हैं। फाइल्स 24 घंटे में ही हटा दी जाती हैं। आपको एक अलग आईडी दी जाती है जिसके जरिए दूसरे शेयर की गई फाइल्स डाउनलोड कर सकते हैं।

www.pipe.com
नाम के नए फ्री ऐप के जरिए आप अपने ऑनलाइन दोस्त से 1GB तक की फाइल शेयर कर सकते हैं। साथ ही ऑफलाइन दोस्तों के लिए आप 100MB तक की फाइल पाइप के क्लाउड स्टोरेज में सेव कर सकते हैं।

स्काइप के जरिए

स्काइप मेसेंजर पर बातचीत और वीडियो चैटिंग के अलावा इंस्टैंट मेसेज के जरिए फाइल्स भी शेयर की जा सकती हैं। इसके जरिए एक बार में 100MB तक की फाइल भेजी जा सकती है।

पर्सनल क्लाउड स्पेस
आप गूगल ड्राइव, ड्रॉपबॉक्स, बॉक्सडॉटनेट या स्काईड्राइव जैसी क्लाउड स्टोरेड साइट्स के जरिए भी चीजें शेयर कर सकते हैं। इसके लिए बस आपको फाइल या फोल्डर सेलेक्ट कर उसका ईमेल पता बताना होगा जिससे आप ये फाइल्स शेयर करना चाहते हैं।

नेटवर्क ड्राइव
WD मायबुक लाइव और सीगेट गोफ्लेक्स होम जैसे नेटवर्क ड्राइव डेटा बैकअप के साथ-साथ.इंटरनेट पर फाइल्स ऐक्सेस करने के भी अच्छे ऑप्शन हैं। इसके लिए आप जिन फाइल्स को शेयर करना चाहते हैं, उनकी सेटिंग्स के जरिए उन्हें इंटरनेट पर ऐक्सेसिबल कर दें। फिर इन फाइल्स के लिंक और लॉग-इन डिटेल्स शेयर कर सकते हैं।
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Unknown

लैपटॉप की बैटरी लाइफ बढ़ाने के 6 टिप्स

हम में से ज्यादातर लोग अपने लैपटॉप की बैटरी जल्द खत्म हो जाने से परेशान रहते हैं। आइए आपको बताते हैं लैपटॉप की बैटरी लाइफ बढ़ाने के 6 तरीके।

  • स्मार्टफोन की तरह लैपटॉप की स्क्रीन बैटरी का बड़ा हिस्सा खाती है। ब्राइटनेस लेवल कम से कम रखिए। अगर जरूरत न हो, तो कीबोर्ड की बैकलाइट भी ऑफ कर दीजिए।

  • यूएसबी पोर्ट में लगे एक्सटर्नल डिवाइसेज़ लैपटॉप की बैटरी से ही पावर लेते हैं। जरूरत न हो, तो इन्हें लैपटॉप से निकाल दीजिए।

  • लैपटॉप के ज्यादा गर्म होने की वजह से इंटरनल फैन्स को ज्यादा तेज चलता पड़ता है, जिससे बैटरी ज्यादा खर्च होती है। अधिकतर लैपटॉप कूलिंगपैड भी लैपटॉप से ही पावर लेते हैं। लैपटॉप को ठंडी जगह पर रखिए। कोशिश करिए कि लैपटॉप का ज्यादातर हिस्सा (खासकर निचला हिस्सा) हवा के संपर्क में रहे।

  • स्टैंडबाई की जगह अपने लैपटॉप को हाइबरनेट करिए। हाइबरनेशन में आपका लैपटॉप जस का तस रखते हुए स्लीप मोड में चला जाता है और बैटरी बचाता है।

  • विंडोज़ पर चलने वाले लैपटॉप में बिल्ट-इन पावर प्लान सेटिंग होती है। आप यहां कई चीजें चुन सकते हैं, जैसे कि डिस्प्ले, हार्ड डिस्क और यूएसबी पावर कब ऑफ हों।

  • बैटरी से जुड़े कई ऐप्लिकेशन मौजूद हैं। ये बैटरी डिस्चार्ज साइकल बताते हैं। ये सीपीयू और हार्डड्राइव का टेंपरेचर भी बताते हैं, जिससे ओवरहीटिंग का पता चलता है।
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Unknown

स्मार्टफोन से लीजिए रिमोट कंट्रोल का भी काम =bestindiatrick

स्मार्टफोन या टैबलट से बहुत से बहुत से ऐसे काम किए जा सकते हैं, जिनके बारे में आपने शायद ही कभी सोचा हो। इनसे होम अप्लायंस कंट्रोल किए जा सकते हैं। यहां तक कि इनसे कार स्टार्ट स्टार्ट की जा सकती है। यह काम कुछ फ्री ऐप्स और सिस्टम्स के जरिए किया जा सकता है।


कार के लिए
वाइपर स्मार्टस्टार्ट आईओएस, ऐंड्रॉयड या ब्लैकबेरी स्मार्टफोन के जरिए कार को लॉक, अनलॉक और स्टार्ट करने की सहूलियत देता है। इसके लिए कार में वाइपर सिक्यॉरिटी सिस्टम और स्मार्टफोन मॉड्यूल लगा होना चाहिए। ऐप यह भी याद रखता है कि कार कहां पार्क है और ऑगमेंटेड रिऐलिटी के जरिए फोन पर डायरेक्शन भी बताता है। फिलहाल स्मार्टस्टार्ट सिर्फ यूएस बेस्ड जीएसएम प्रवाइडर्स के साथ काम करता है, लेकिन कंपनी इस ऐप को हर जगह काम करने लायक बनाने की कोशिश में जुटी है।

होम अप्लायंस के लिए
लीडिंग होम ऑटोमेशन ब्रैंड क्रेस्ट्रॉन हर इंस्टॉलेशन के साथ यूनिवर्सल रिमोट कंट्रोल देती है। यह आईओएस और ऐंड्रॉयड डिवाइसेज़ के लिए ऐप भी देती है। ये ऐप वाई-फाई के जरिए क्रेस्ट्रॉन से कनेक्ट होते हैं और सिस्टम से कनेक्ट होम अप्लायंस को रिमोट कंट्रोल करने की सहूलियत देते हैं। बेसिक ऐंड्रॉयड ऐप फ्री है, लेकिन आईओएस और ऐंड्रॉयड के प्रो वर्जन की कीमत 5,000 रुपए है।

कंप्यूटर के लिए
मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम्स पीसी/मैक के कई पहलू को कंट्रोल करने के लिए कई तरह के ऐप्स बनाते हैं। इनके जरिए माउस पॉइंटर और इनपुट टेक्स्ट को कंट्रोल किया जा सकता है या ऑडियो-विडियो प्लेयर, प्रेजेंटेशन वगैरह जैसे ऐप्लिकेशंस हैंडल किए जा सकते हैं। हर ऐप के लिए पीसी/मैक पर छोटा सर्वर ऐप्लिकेशन इंस्टॉल करना पड़ता है, जो फ्री होता है।

ऐंड्रॉयड के लिए
फ्री ऐप जीमोट से वाई-फाई के जरिए पीसी, मैक या लाइनक्स म्यूजिक और विडियो प्लेयर कंट्रोल किया जा सकता है। इसे इंस्टॉल करने पर बैकग्राउंड में ऐल्बम आर्ट के साथ स्क्रीन पर बहुत से कंट्रोल दिखते हैं। इस पर प्लेबैक के लिए फाइल ब्राउज या सिलेक्ट किया जा सकता है। दूसरा फ्री ऐप विन रिमोट है, जिससे विंडोज़ पीसी को वाई-फाई या ब्लूटूथ के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। इसके जरिए लगभग सबकुछ - ब्राउजर, टास्क मैनेजर, ऑडियो-विडियो प्लेयर, ईमेज व्यूअर यूज़ किया जा सकता है।

आईफोन/आईपॉड टच के लिए
लॉजिटेक का माउस आईफोन/आईपॉड टच के लिए सबसे अच्छा फ्री रिमोट ऐप है। यह आपकी मशीन को वाई-फाई के जरिए कनेक्ट करता है और 3.5 इंच के डिस्प्ले को इनपुट डिवाइस में कन्वर्ट करता है। इसमें मल्टि टच जेस्चर के साथ माउस पॉइंटर को कंट्रोल किया जा सकता है। टेक्स्ट इंटर करने के लिए ऑन स्क्रीन कीबोर्ड यूज किया जा सकता है। ऐपल का फ्री ऐप रिमोट आईट्यूंस को कंट्रोल करने के लिए बेस्ट है। आई-क्लिकर जैसे ऐप्स को प्रेजेंटेशन, वीएलसी रिमोट को वीएलसी प्लेयर के लिए यूज किया जा सकता है।

विंडोज फोन 8 और ब्लैकबेरी के लिए
वेक्टिर के ब्लूटूथ/वाई-फाई रिमोट से वीएलसी मीडिया प्लेयर, आईट्यूंस, विंडोज मिडिया प्लेयर और पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन लॉन्च और कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें ब्लैकबेरी या विंडोज़ फोन8 डिवाइसेज़ से डेस्कटॉप देखने और हैंडल करने के लिए रिमोट डेस्कटॉप फीचर्स हैं।

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करें स्पीकर से जान पहचान || bestindiatrick

वह जमाना और था जब डिवाइस खामोशी से घर का हिस्सा हुआ करते थे और स्विच ऑन करने पर ही आप तक अपनी सेवाएं पहुंचाते थे। अब सब बदल चुका है, हर डिवाइस की अपनी आवाज है। ऐसे में स्पीकरों की दुनिया अब केवल म्यूजिक सिस्टमों तक ही सीमित नहीं रह गई है। बात कंप्यूटर की हो, टीवी की या फिर टैब और मोबाइल की, हर डिवाइस अपने आप में एक म्यूजिक सिस्टम है और स्पीकर के सहारे यह आपकी दुनिया को आवाजों से सराबोर कर सकता है। अगर इस्तेमाल के हिसाब से देखें तो स्पीकर्स को दो कैटिगरी में बांटा जा सकता है। एक वे जो म्यूजिक सिस्टम या टीवी आदि के साथ के साथ अटैच करके स्थायी तरीके से रखे जा सकते हैं और दूसरे वे जो मूवमेंट वाली डिवाइसों (टैब और मोबाइल आदि) के साथ आराम से इधर-उधर किए जा सकते हैं।


 


इनको भी जानें स्पीकर खरीदने का ख्याल आते ही PMPO और RMS जैसे कुछ खास शब्द आपके दिमाग में कुलबुलाने लगते होंगे। इनके बारे में जानना भी बहुत जरूरी है।

PMPO (Peak Music Power Output) यह शब्द आपको लगभग हर म्यूजिक सिस्टम के प्रचार में सुनाई और दिखाई पड़ता होगा। आपको शायद यह जान कर हैरानी होगी कि तकनीक के मामले में इसकी कोई अहमियत नहीं है और न ही यह किसी स्पीकर की ताकत नापने का कोई स्टैंडर्ड पैमाना है। यह प्रचार की दुनिया में गढ़ा गया एक शब्द है, जो स्पीकर से आने वाली सबसे ऊंची आवाज को आइडियल कंडिशन में नाप कर बनाया गया है। PMPO का नंबर ज्यादा होना स्पीकर के अच्छे होने की गारंटी नहीं देता।

RMS (Root Mean Square) कई स्पीकर इसको स्पीकर की क्षमता को नापने की बेहतर यूनिट मानते हैं। आरएमएस के जरिए हम यह पता लगा सकते हैं कि लगातार बजाने पर कोई स्पीकर कितनी तेज और साफ आवाज में बज सकता है। सरल भाषा में समझें तो आरएमएस के पैमाने पर कस कर स्पीकर खरीदने में ही समझदारी है। जितना अधिक आरएमएस होगा, उतनी ही बेहतर आपको आवाज मिलेगी। आमतौर पर इसे वॉट में नापा जाता है। हालांकि इसे भी कई जानकार स्पीकर का सटीक पैमाना नहीं मानते।

Hz (हर्ट्ज) हमारे कानों तक कोई आवाज कंपन के कारण ही पहुंचती है और कंपनों को नापने के पैमाने को हर्ट्ज कहा जाता है। इस लिए स्पीकर की संवेदशीलता (फ्रीक्वेंसी) को भी हर्ट्ज से ही नापा जाता है। स्पीकर की फ्रीक्वेंसी रेंज जितनी ज्यादा होगी उतनी ही अलग-अलग आवाजें हम सुन सकेंगे। इंसानी कान 20hz-20,000hz तक की आवाज को आसानी से सुन सकते हैं।
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ऐसे पता करें कहीं हैक तो नहीं हुआ आपका जीमेल खाता | bestindiatrick

हाल में ही याहू मेल इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों के यूजरनेम और पासवर्ड हैक हो गए हैं। पिछले दो महीने में याहू की ई-मेल सेवा में सेंधमारी की यह दूसरी घटना है। किसी का मेल अकाउंट के हैक होने की खबर नई नहीं है। ऐसे में हर किसी के लिए यह जानना जरूरी है कि अपने ई-मेल खाते को सेफ कैसे रखा जाए। दुनिया में ईमेल के लिए गूगल का जीमेल सबसे ज्यादा यूज किया जाता है। जीमेल पर विश्व में लगभग 500 मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं जो डेली 100 बिलियन ईमेल करते हैं। 

 

अगर आप भी जीमेल यूज करते हैं तो आपको यह पता होना चाहिए कि उसे कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। अकाउंट की सुरक्षा के लिए उपाय तो अलग बात हैं लेकिन आप को कैसे पता चलेगा कि किसी और ने आपका अकाउंट हैक कर लिया है। आइए आपको बताते हैं एक आसान तरीका जिससे जिससे आपको पता चल जाएगा कि कहीं आपका अकाउंट कोई और तो नहीं यूज कर रहा।


गूगल ने जीमेल में कुछ ऐसे टूल्स दिए है जिनकी सहायता से आप अपने अकाउंट को लॉक कर सकते हैं। यह आपको बताएगा किस समय, किस ब्राउजर और किस आईपी एड्रेस से आपको जीमेल अकाउंट को खोला गया है। इस तरह आप अपने अकाउंट को सेफ रख सकते हैं।

- सबसे पहले अपना जीमेल अकाउंट खोलें, स्क्राल डाउन करें और सबसे नीचे की तरफ आफको डिटेल्स (Details) का एक आइकन दिखाई देगा।


- डिटेल्स पर क्लिक क्लिक करेंगे तो एक pop-up window खुलेगी जिस पर "Activity Information" दिखेगी। इस में आपको बताया जाएगा कि आपके अकाउंट को किस लोकेशन से, किस समय और कितने समय तक यूज किया गया है। साथ ही ब्राउजर और IP पता भी दिखेगा। आप अपने ऑफिस और घर के आईपी से मिलाकर देखा सकते हैं कि कहीं और से आपका अकाउंट यूज तो नहीं हुआ।


- Activity Information window में आपको एक और विकल्प मिलेगा जिसमें लिखा होगा कि "Sign Out All Other Sessions"(अगर आपका जीमेल कहीं और भी खुला है तो उसे लॉग आउट करें)। इसे यूज करके आप सभी डिवाइस से आप तुरंत ही लॉग आउट हो जाएंगे।
- इस तरह से आपको पता चल जाएगा कि आपका अकाउंट कोई और व्यक्ति भी यूज कर रहा है। अगर ऐसा है तो तुरंत अपना पासवर्ड बदल लें।

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ऐंड्रॉयड फोन पुराना, धीमा है? फोन न बदलें, नया लॉन्चर लें|| bestindiatrick

करण बजाज और हितेश राज भगत ऐंड्रॉयड के साथ एक अच्छी बात यह है कि इसे आप जितना चाहें कस्टमाइज कर सकते हैं। अगर आपको कोई चीज पसंद नहीं है, तो उसे बदला जा सकता है। अपने डिवाइस को अपनी पसंद के मुताबिक बनाने का एक आसान तरीका लॉन्चर है। लॉन्चर्स धीमे डिवाइस की स्पीड बढ़ाने या फॉन्ट और आइकन बड़े करने जैसे काम भी कर सकते हैं। 
 
 टैबलट के लिए लॉन्चर
यह टैबलट पर बड़ा डिस्प्ले आइकन और विजेट्स को कस्टमाइज करने के लिए स्क्रीन पर काफी जगह देता है। आप ऐप ड्रॉर में रो/कॉलम की संख्या बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके लिए फ्री आरयूआई लॉन्चर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो इंटेलिजेंट ऐप मैनेजमेंट ऑफर करता है। यह बजट टैबलट्स पर भी अच्छा काम करता है। आप फ्री गो लॉन्चर भी ट्राई कर सकते हैं, जो एक्स्ट्रा कस्टमाइजेशन की पेशकश करता है और हाई स्क्रीन रिजॉल्यूशन वाले टैबलट के लिए भी अच्छा है। अगर आप पैसा खर्च करने के लिए तैयार हैं, तो अपेक्स लॉन्चर प्रो, नोवा लॉन्चर प्राइम या केमेलियन लॉन्चर खरीद सकते हैं। ये तीनों बजट ऐंड्रॉयड टैबलट्स के लिए भी बेहतर हैं।

हर दिन नया लुक रखें
ज्यादातर लॉन्चर एक डिफॉल्ट थीम के साथ ही होते हैं, जबकि कुछ आपको उसी थीम में रंग बदलने की सुविधा देते हैं। हालांकि अगर आप भीड़ से अलग रहना चाहते हैं तो फ्री बज लॉन्चर या थीमर ट्राई करें। इनके साथ यूजर ऐप का इस्तेमाल कर खुद थीम तैयार कर सकते हैं। ये पूरी यूजर कम्यूनिटी के लिए भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं। आप हजारों थीम्स से अपनी पसंद चुन सकते हैं। इसके साथ ही ये इंस्टॉल्ड ऐप्स के स्मार्ट मैनेजमेंट की सुविधा भी देते हैं। यह ध्यान रखें कि प्रत्येक थीम को अलग से डाउनलोड करने की जरूरत होती है। 

ऑटोमैटिक कैटिगराइजेशन
अगर आपके डिवाइस पर बड़ी संख्या में ऐप्स हैं और इन्हें संभालना आपके लिए मुश्किल हो रहा है, तो जिनलेमन का फ्री स्मार्ट लॉन्चर ट्राई करें। यह गेम्स, कम्यूनिकेशन, मीडिया, यूटिलिटी, सेटिंग्स और इंटरनेट कैटिगरीज में ऐप्स को सॉर्ट कर देता है और इससे उन्हें खोजना आसान हो जाता है। पहली बार लॉन्च करने पर यह आपसे म्यूजिक, गैलरी, कैमरा और ब्राउजर के लिए आपके पसंदीदा ऐप्स के बारे में पूछता है और इसके बाद इन्हें आसान पहुंच के लिए संबंधित आइकन्स में रख देता है। अगर आप होमस्क्रीन पर विजेट्स रखना चाहते हैं, तो आपको प्रो वर्जन खरीदना होगा। यह सेकंड होमस्क्रीन और अडिशनल ट्रांजिशन इफ्केट्स जोड़ देता है।

क्या आपका डिवाइस पुराना और धीमा है?
मार्केट में मॉडर्न फीचर्स और तेज स्पीड वाले बहुत से ऐंड्रॉयड डिवाइसेज उपलब्ध हैं, लेकिन इनके साथ ही यूजर्स के पास ऐसे बहुत से डिवाइसेज हैं, जिनका हार्डवेयर पुराना हो चुका है और जिनकी स्पीड काफी कम है। इनके लिए फ्री लॉन्चर प्रो का इस्तेमाल करें। यह विशेष तौर पर पुराने डिवाइस के लिए डिजाइन किया गया है और सिंगल कोर प्रोसेसर वाले डिवाइस पर भी अच्छा काम करता है। हालांकि, इसके साथ आपको बहुत अधिक फीचर्स या कस्टमाइजेशन के ऑप्शंस नहीं मिलते। इसका पेड वर्जन भी है, लेकिन इसे खरीदना समझदारी नहीं होगी, क्योंकि यह लगभग फ्री वर्जन जैसा ही है।

हमारी सलाह और बेस्ट ऑल-राउंडर
अगर आप फास्ट और बेहतर लॉन्चर की तलाश में हैं, तो लाखों थीम पर ध्यान न दें। आपके लिए नोवा बेहतर रहेगा। इसका फ्री वर्जन फोन और टैबलट, दोनों पर शानदार चलता है। इसका प्रीमियम प्राइम वर्जन भी है, जो जेस्चर कंट्रोल, ऐप ड्रॉर में फोल्डर्स और कम इस्तेमाल होने वाले ऐप्स को छिपाने जैसे फीचर्स के साथ आता है। यह आपके डिवाइस की स्पीड बढ़ाने और सभी गैर-जरूरी ऐनिमेशंस हटाने का शायद सबसे तेज तरीका है। अगर आपको यह पसंद नहीं आता, तो आप लाइटनिंग लॉन्चर ट्राई कर सकते हैं। यह मेमरी का कम इस्तेमाल करता है और इसका एक अनूठा फीचर डेस्कटॉप है, जो ऊपर, नीचे और दायें, बायें स्क्रॉल करता है। इससे आप अपने सबसे अधिक इस्तेमाल वाले ऐप्स और विजेट्स सभी दिशाओं में रख सकते हैं।

बड़ी उम्र और दिखने में परेशानी वाले लोगों के लिए
ऐवरेज ऐंड्रॉयड डिवाइस बड़े होते जा रहे हैं और एक स्क्रीन में इन्फर्मेशन भी बढ़ रही है। इस कारण सीनियर सिटीजंस और ऐसे लोगों के लिए इनका इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है, जिन्हें कम दिखाई देता है। ऐंड्रॉयड इंटरफेस में आइकन और फॉन्ट साइज बढ़ाने के लिए कुछ ऑप्शंस हैं, लेकिन आप बहुत कम अजस्टमेंट कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपको बिग लॉन्चर की जरूरत होगी। यह आपको न केवल बड़े और आसानी से पढ़े जाने वाले आइकन देता है, बल्कि ऐंड्रॉयड का इस्तेमाल भी आसान बनाता है। इसमें हाई-कंट्रास्ट कलर थीम्स के साथ ही नई थीम्स हासिल करने कीक्षमता भी है। यह ऐंड्रॉयड 2.1 या इसके बाद वाले वर्जन के साथ काम करता है। लॉन्चर काफी महंगा है और इस वजह से आप इसे खरीदने से पहले इसके फ्री डेमो वर्जन को ट्राई कर सकते हैं।
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Windows का पासवर्ड क्रैक कैसे करें बिना किसी Software के // bestindiatrick

अगर आप अपने कम्प्यूटर में पासवर्ड डालकर भूल गये हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।

आज मैं इस लेख मे एक ऐसा उपाय बताने जा रहा हूं जिससे आप आसानी से Windows वाले कम्प्यूटर का पासवर्ड बदल सकते हैं।

 
 आपने Windows के पासवर्ड को Crack करने के कई तरीके पढें होंगे जिसमें आपको CD या किसी Software की मदद लेनी पडती है, लेकिन एक ऐसा तरीका भी है जिससे आप बिना CD या किसी Software के पासवर्ड आसानी से बदल सकते हैं जिसे मैंने नीचे Screenshot के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है ।

सबसे पहले अपने कम्प्यूटर को Reboot करें और "F8" बटन दबाकर "Safe Mode with Command Prompt" Option को चुनें।
अब Command Prompt को ओपन करें और नीचे स्क्रीनशॉट के अनुसार Commands का उपयोग करें

पढ़ें : Crack करें किसी भी Trial Version Software को
सबसे पहले टाईप करें- Net User और Enter दबायेंटाईप करें- Net User अपना यूजर नेमऔर Enter दबायें (Screenshot में user name Vivek है ) अब Net User यूजर नेम * टाईप करेंअब अपना नया पासवर्ड डालें ( पासवर्ड टाईप करते वक्त दिखाई नही देगा )
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